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खाना पकाने के लिए मैटल के बने बर्तन खासतौर पर स्टेनलैस स्टील के बर्तन ही काम में लें। हमारे देश में बहुत से लोग मिट्टी के तवे और अन्य बर्तन काम में लेते हैं। ध्यान रहे, धातु के बर्तन उष्मा के बेहतरीन परिचालक होते हैं, मिट्टी के नहीं। सामान्य भाषा में मिट्टी के बर्तन ज्यादा गैस खपत करते हैं जबकि धातु के बर्तन गैस की बचत करते हैं।

अगर आपके गैस बर्नर से पीले रंग की आंच निकल रही है, तो समझ लीजिए कि बर्नर पूरी तरह से गैस को यूज नहीं कर पा रहा है। अगर बर्नर को ठीक ढंग से व्यवस्थित करने के बाद भी ऐसा हो रहा है, तो बेहतर है कि इसे तकनीशियन को दिखाएं। बर्नर से पीले रंग की आंच का मतलब यह भी है कि आपकी गैस व्यर्थ में जा रही है। अगर आप इसे नजरअंदाज करते हैं, तो आपकी गैस ज्यादा खर्च होती रहेगी। ध्यान रहे, नीले रंग या रंगविहीन आंच ही आपकी गैस के सही उपयोग होने की निशानी है।

बहुत कम लोगों को पता है कि ज्यादा चौड़े पैंदे वाले बर्तन गैस की बचत करते हैं। चौड़े पैंदे वाले बर्तनों से बर्तन का सतही क्षेत्र बढ़ जाता है इससे खाना पकाने में समय कम लगता है। साथ ही चौड़े बर्तन गैस की लौ को पूरी तरह कवर कर लेते हैं और गैस का अधिकतम इस्तेमाल होता है। इससे गैस की बचत होती है। साथ ही अगर आप ऐसे बर्तनों को ढक कर रखते हैं, तो और गैस बचाई जा सकती है।

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फ्रिज में रखे हुए पदार्थों अथवा बाजार से लाए हुए बेहद ठंडे पदार्थों को सीधे गैस पर नहीं रखें। इन पदार्थों को आपके घर के तापमान के बराबर आने तक का इंतजार करें। सामान्य शब्दों में जब तक उस पदार्थ का तापमान सामान्य ना हो जाए, तब तक उसे गैस पर नहीं रखें। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो जमे हुए पदार्थ को सामान्य तापमान पर लाने के लिए अतिरिक्त गैस खर्च करनी ही पड़ेगी।

अगर आप पानी या दूध गैस पर गर्म कर रहे हैं और ये उबलने लगे हैं, तो ठीक उसी समय गैस को सिम मोड पर कर दें। ऐसे मौके पर गैस सिम करने से खपत स्वत: ही कम हो जाती है। ऐसा आप अन्य व्यंजन बनाते समय भी कर सकते हैं। अधिकतर लोग कम समय में चीजों को उबालने के लिए लौ तेज रखते हैं, यह गैस भी बर्बाद करता है और बर्तनों को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

खाना पकाने के लिए जहां तक संभव हो, बर्तनों को खुला नहीं छोड़ें। ऐसा खाना पकाते समय बर्तन को ढक कर रखें। बर्तन पर ढक्कन रखने से बड़ी मात्रा में गैस की बचत होती है। ज्यादा से ज्यादा कुकर का इस्तेमाल करें। इससे गैस भी बचेगी और समय भी।

अगर आप दाल, चना, छोले, राजमा आदि की सब्जियां या ऐसा ही कोई व्यंजन बना रहे हैं, तो पहले इनको भिगोएं, इससे इन्हें पकाने में कम समय लगेगा और साथ ही गैस की खपत भी कम होगी।

ध्यान रखें, बर्तन या तवे को गर्म करते समय ही गैस को फुल मोड पर रखें। जैसे ही बर्तन या तवा गर्म हो जाए, गैस को मिडियम अथवा स्लो मोड पर कर दें। गौरतलब है कि बर्तन को गर्म करने में जितनी उष्मा चाहिए होती है उतनी खाना पकाने में नहीं चाहिए होती है।

गैस पर रखने से पहले धोए हुए बर्तनों को सुखा लें। इससे बर्तन सुखाने के लिए जो गैस बेकार ही जाया होती है वह बच जाएगी। खाने में ज्यादा पानी का इस्तेमाल नहीं करें। पानी की मात्रा ज्यादा होने से अतिरिक्त पानी के वाष्पीकरण में ज्यादा गैस लगती है। इसे आप सही मात्रा में पानी डालकर बचा सकते हैं।

गैस पर खाना पकाने से पहले सब्जी इत्यादि को काट-छांट कर तैयार कर लें। मसाले, आटा इत्यादि को भी पहले से तैयार रखें। इससे आप सीधे गैस का अधिकतम उपयोग कर पाएंगे और तैयारी में लगने वाले समय में गैस बर्बाद नहीं होगी।
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